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सोहत हैँ सुख सेज दोऊ सुषमा से भरे सुख के सुखदायन / नंदराम

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सोहत हैँ सुख सेज दोऊ सुषमा से भरे सुख के सुखदायन ।
त्योँ नन्दरामजू अँक भरै परयँक परै चित चौगुने चायन ।
चूमत हैँ कलकँज कपोल रचैँ रस ख्यालहूँ सील सुभायन ।
साँवरी राधा गुमान करै तब गोरे गुबिन्द परैँ लगि पायन ।


नंदराम का यह दुर्लभ छन्द श्री राजुल मेहरोत्रा के संग्रह से उपलब्ध हुआ है।