भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

स्मृति / आरती कुमारी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

आज
कई दिनों बाद
स्मृति के जादूगर ने
पलट डाले
जिंदगी की किताब के
कई पृष्ठ ..
वक्त की स्याही से लिखे
उन पन्नों पर दिखे
अठखेलियाँ करते शब्द
अनुशासित भाव
कुछ स्पंदित क्षण
सूखे गुलाब के निशान
और
आँखों की नमी से धुले
तुम्हारे ख़त...