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स्वर्ग की याद / अमिताभ बच्चन

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स्वर्ग मेरे स्कूल के रास्ते में आता था
ऊँची दीवारों, अमरूद के पेड़ों, मेंहदी की झाड़ियों के पीछे

अन्दर दाखिल होते ही ऋषि-मुनियों के
घुमावदार अक्षरों वाले नेम-प्लेट दिखते
देवता कारों से निकलते
देवियों-परियों का मेला लगता एक क्लब में
दुर्गा देवी की विशाल मूर्ति के सामने अप्सराएँ नाचतीं

पिता के साथ एक बार कुछ देवताओं को बहुत क़रीब से देखा
जो बहुत वृद्ध हो गए थे और भ्रमरगीत सार पढ़कर एक दूसरे को सुनाते
हँसते और पूर्ण सन्तुष्ट दिखते
वे बहुत सारे न्याय-युद्धों में विजयी रहे थे

मरे हुए बच्चों को चुटकी बजाकर खड़ा कर देने वाले
एक देवता का चेहरा याद है मुझे
वे बंगाली थे
उनकी सिगरेट कभी नहीं बुझती थी


Amitabh Bachchan

 MEMORY OF PARADISE

On my way to school lay paradise
Behind high walls, guava trees and henna shrubs

Just beyond the entrance one could see
Name plates of sages and saints in floral script
Divinities going in and out in cars
Once a year the Club would host the carnival of fairies and goddesses
Celestial nymphs would dance before the huge idol of Durga

With my father I saw some of the deities at close
They were really old, would read each other Song of the Dark Bumblebee*
They laughed and appeared quite contented
They were victors of many a battles for justice

I distinctly remember the face of a deity
Who would make dead children get up with the flick of a finger
He was a Bengali
His cigarette never went out.

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  • Bhramar gīt (भ्रमर गीत), a series of poems from Sūrsāgar of Sūrdās.



(Translation from Hindi by Asad Zaidi)