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हर तरफ़ रौशनी है सूरज की / ओम प्रकाश नदीम

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हर तरफ़ रौशनी है सूरज की ।
वाह क्या ज़िन्दगी है सूरज की ।

आँख देखा भी सच नहीं होता,
चाँदनी, रौशनी है सूरज की ।

प्यास को और भी बढ़ाती है,
धूप, ऐसी नदी है सूरज की ।

आसमाँ सुर्खरू-सा लगता है,
पालकी आ रही है सूरज की ।

ताकि ख्वाबीदा लोग जाग उठें,
इसलिए बात की है सूरज की ।