भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हाथऽ आरती हो बाघेसरी ठाड़ा रह्या / निमाड़ी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

हाथऽ आरती हो, बाघेसरी ठाड़ा रह्या,
जोवऽ ते पोहा की बाट,
गढ़ रे गुजरात पोहो सबई आयो,
नहीं आई म्हारी भोळई निमाड़।
भोळई निमाड़ का रे अमुक भाई,
काहे मंऽ रहया बिलमाय?
कसोक छे रे देवी थारो मानवई
कसीक छे रे निमाड़,
कालो घोड़ो रे खुर बाटळो
पातळियो छे असवार,
कांधऽ खड़ियो, रे हाथऽ लाकड़ी,
मोठा जी भाई, जै बोलता आवऽ
ज्वार रे तोर को रे, देवी म्हारो घावणो,
माया मंऽ रहयो बिलमाय!