भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

हाय रे! ये माह फाग / अभिषेक कुमार अम्बर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हाय रे ! ये माह फ़ाग दिल में लगाये आग,
गोरियों को देख प्रेम उमड़े है मन में।
लगती हैं लैला हीर नजरों से मारें तीर,
बिज़ली सी दौड़ पड़े सारे ही बदन में ।
बन गया में शिकार हाय बैठा दिल हार,
उसकी ही सूरतिया बसी अखियन में।
दिल को नहीं करार हाये होलीका है इंतज़ार
रंगों में रंगूँगा तुझे रंगीले सजन में।

(घनाक्षरी छंद)