भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

होली आई / शिवराज भारतीय

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


होली आई होली आई
हर चेहरे पर मस्ती छाई

कहीं चंग पर गीत सुरीले
झूमें कहीं जवान सजीले,
सजधज कर के ठुमक-ठुमक
महरी बनकर नाचे भाई
होली आई होली आई

बनकर राधा-कृष्ण कन्हाई
रास रचाते लोग-लुगाई,
रामू और कुलविंदर के संग
भंगड़ा करता असगर भाई
होली आई होली आई।
ढमक-ढमक ढोलक बोली
आओ मिलकर खेलें होली,
रंग-अबीर गुलाल मले सब
पिचकारी ने धूम मचाई
होली आई होली आई।