भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

12 / हीर / वारिस शाह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

हजरत काज़ी ने पैंच सदा सारे भाइयां जिमीं नूं कछ पवाइयां ई
वढी दे के जिमीं लै गये चंगी बंजर जिमीं रंझेटे नूं आइया ई
कछां मार शरीक मजाक करदे भाइयां रांझे दे बाब बनाइया ई
गल भाइयां भाबिआं एह बना छडी मगर जट दे फकड़ी लाइया ई

शब्दार्थ