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13 / हीर / वारिस शाह

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पिंडा छांट के आरसी नाल देखन तिनां ढंग केहा हल वाहुना ई
पिंडा पाल[1] के चोपड़े पटे जिहना किसे रन्न की उहनां नूं चाहुना ई
जिहड़ा भूई दे मामले करे मुंडा एस तोड़ ना मूल निबाहुना ई
दिहें वंझली वाहे ते रात गावे किसे रोज दा ऐह प्राहुना ई

शब्दार्थ
  1. शौकीन