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142 / हीर / वारिस शाह

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मैंनूं मार के उधलां मुंज कीता झुगी लाए मुआतड़े साड़ियां ने
दौर भन्न के कुटके साड़ मेरे पैवंद जुलियां फोल के पाड़ियांने
भन्न कुटीया मेरी अफीम लुटी मेरी बावनी चाए उजाड़ियां ने
धाड़ेमार धड़वैल एह माल लुटण मेरा मुलख लुटिया ऐनां लाड़िया ने
झूठियां सचियां चुगलियां मेल के ते घरोघरी तूं लूतिया[1] सुनावना एं
पिउ पुतरां नूं यार यार कोलों मावां धीयां नूं पाड़ वखावना एं
तैनूं बान है बुरा कमावने दी ऐवें टकरां पया लड़ावना एं
परां जा शाह जटा पिछा छड साडा एवड कास नूं पिआ अकावनाएं

शब्दार्थ
  1. चुगलियां