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186 / हीर / वारिस शाह

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मुंडे मास चावल दाल दहीं धगड़ एह माहियां पालियां राहियां नूं
सभा चूहड़े चपड़े रज रहे राखे जेहड़े सी सांभदे वाहियां नूं
कासे चाक चोबर सीरी डंगरां नूं दहीं मुखपा जिउ दिसन बिलाइयां नूं
दाल शोरबा रसा मठा मंडे डूमां ढोलियां कंजरां नाइयां नूं

शब्दार्थ