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18 / हीर / वारिस शाह

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भाबी आखदी गुंडया मुंडया वे साडे नाल की रिक्तां चाइयां नी
वली जेठ ने जिहना दे फतू देवर डुब मोइयां ओह भरजाइयां नी
घरो घरी विचारदे लोक सारे सानूं केहियां फाहिआं पाइयां नी
वारस गल न बनेगी नाल साडे परना लया स्यालां दीयां जाइयां नी

शब्दार्थ