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196 / हीर / वारिस शाह

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मेल मेल सयालां ने जंज आंदी लगीयां सौण[1] शगन करावने नूं
घत सुरम सलाइयां देण गाल्हां अते खडुकने[2] नाल खडावने नूं
भरी घढ़ी घड़ोली ते कुड़ी नहाती आइयां फेर नकाह पढ़ावने नूं
मौली नाल चा खिचया गभरू नूं रोढियां लगियां आन खुवावणे नूं

शब्दार्थ
  1. शादी के समय दी जाने वाली कसम
  2. शादी के समय खेला जाने वाला एक खेल