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1 / हीर / वारिस शाह

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अवल हमद[1] खुदा दा विरद[2] कीजे इश्क कीता सु जग दा मूल मियां
पहिलां आप ही रब्ब ने इशक कीता ते माशूक है नबी रसूल[3] मियां
इशक पीर फकीर दा मरतबा है मरद इशक दा भला रसूल मियां
खुले तिनां दे बाग कलूख[4] अंदर जिन्हा कीता है इशक कबूल मियां

शब्दार्थ
  1. स्तुति
  2. सिमरन
  3. हज़रत मुहम्मद
  4. दिल