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200 / हीर / वारिस शाह

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कलबुल मोमनी[1] अरश अल्लाह काज़ी अरश अल्लाह दा ढाह नाहीं
जिथे रांझे दे इशक मुकाम कीता ओथे खेड़यां दी कोई जाह नाहीं
एह चढ़ी गुलेल है इशक वाली ओथे होर कोई चाड़ लाह नाहीं
जिस जीवने काज ईमान वेचां एह कौन जो अंत फनाह नाहीं
जेहा रंघड़ा विच ना पीर कोई अते लुधरां दा बादशाह नाहीं
वारस शाह मियां काज़ी शरह दे नूं नाल अहल तरीकत[2] दे वाह नाहीं

शब्दार्थ
  1. भगवान के प्यारों के हृदय भगवान के अरश जैसे होते हैं
  2. सच के रास्ते पर चलने वाले लोग