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203 / हीर / वारिस शाह

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जेहड़े छड के राह हलाल दे नूं तकन नजर हराम दी मारिअन गे
कबर विच वहा के मार गुरजी सभे पाप ते पुन्न नतारिअन गे
रोज हशर दे एह गुनहगार सभे घत अग दे विच नघारिअन गे
उस वकत ना किसे साथ रलना खाली जेब ते दसत ही झाड़िअन गे
वारस शाह एह उमर दे लाल मोहरे इक रोज नूं आकबत[1] हारियन गे

शब्दार्थ
  1. आखरी समय