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223 / हीर / वारिस शाह

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भाबी खिजां दी रूत जद आन पहुंची भौर आसरे ते जफर जालदे नी
सेउन बुलबुलां बूटयां सुकयां नूं फेर फुल लगन नाल डाल दे नी
असां जदों कदों उहनां पास जाना जेड़े महरम असाडड़े हाल दे नी
जिन्हां सूलियां ते लए चा झूटे मनसूर होरीं साडे नाल दे ने
वारस शाह जो गए नहीं मुड़दे लोक असां तों औना भालदे ने
मोजू चैधरी दा पुत चाक लया एह पेखने[1] जुल जुलाल[2] दे ने
एस इशक पिछे लड़न मरन सूरे सफां डोलदे खूनियां गालदे नी
भाबी इशक तो नसके ओह जांदे पुत्र होन जो किसे कंगाल दे नी
मारे बोलियां दे घरीं नहीं वड़दे वारस शाह होरी फिरन भालदे नी

शब्दार्थ
  1. तमाशे
  2. सर्व शक्तिमान