भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

231 / हीर / वारिस शाह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

तैनूं चाअ सी वडा वयाह वाला भला होया जे झब वहीजिए[1] नी
एथों निकल गईए भलयां दिनां वांगू अते सौहरे जा पतीजिए नी
रंग रतीए वौहटिए खेडयां दिए कैदो लंगे दिए गुंड भतीजिए नी
चुलियां पा पानी दुखां नाल पाली करमक[2] सैदे दे मापयां बीजिए नी
कासद[3] हीर नूं आखया जायके ते खत चाक दा लिखया लीजिए नी

शब्दार्थ
  1. ब्याह होना
  2. करमों को
  3. खत ले जाने वाला