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238 / हीर / वारिस शाह

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रांझे आखया लुटदी हीर दौलत जरम[1] गालिए तां भेत पा लईए
रंग होर वटाय के जा वड़ीए नाल हीर दे अंग लगा लईए
इक होवना रिहा फकीर मैथों जरा इतना भी वस ला लईए
मखन पालया चिकना नरम पिंडा जरा सवाह दे विच रला लईए
किसे जोगी तों सिखीए सेहर[2] कोई चेले होए के कन्न पड़ा लईए
अगे लोकां दे झगड़े बाल सेके जरा आपने नूं चिनग ला लईए
अगे झंग सयालां दी सैर कीती जरा खेड़यां नूं झोक[3] ला लईए
उथे खुदी गुमान मनजूर नाहीं सिर वेचीए तां भेत पा लईए
वारस शाह महबूब नूं तदों पाईए जदों आपना आप गवा लईए

शब्दार्थ
  1. तन
  2. जादू-टोना
  3. कुटिया