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23 / हीर / वारिस शाह

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साडा हुसन पसंद न लयावना एं जा हीर सयालां दी वयाह लयावीं
वाह वंजली प्रेम दी घत जाली कोई नढी सयालां दी फाह लयावीं
तैनूं वल है रन्नां वलावने दा रानी कोकलां महल तों लाह लयावीं
वारस शाह जे कढनी मिले नाहीं रातीं कंध पछवाड़यों ढाह लयावीं

शब्दार्थ