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241 / हीर / वारिस शाह

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टिले जाय के जोगी दे हथ जोड़े सानूं अपना करो फकीर सांई
तेरे दरस दीदार दे देखने नूं आया देस परदेस नूं चीर सांई
सिदक धार के नाल यकीन आया असीं चेलड़े ते तुसीं पीर सांई
बादशाह सचा रब्ब आलमां दा फकर ओसदे हैन वजीर सांई
बिना मुरशदां राह ना हथ आवन दुध बाझ ना रिझदी खीर सांई
याद हक दी सबर तसलीम निहचा[1] तुसां जग देनाल की सीर[2] सांई
फकर कुल जहान दा आसरा है ताबे फकर दी पीर अमीर सांई
मेरी मां ना बाप ना साक भाई चाचा ताया ना भैन ना वीर सांई
दुनियां विच हां बहुत उदास होया पैरों साडयों लाह जंजीर सांई
वारस छड तैनूं दस जां किथे नजर औना ए जाहिरा पीर सांई

शब्दार्थ
  1. यकीन करके मानना
  2. सांझ