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257 / हीर / वारिस शाह

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रल चेलयां ने चा मता कीता बाल नाथ नूं पकड़ पथलयो ने
छड दवार उखाड़ भंडार चले जा राह ते वाट[1] सब मलयो ने
सेलियां टोपियां कुश्रदां छड चले गुस्से जी दे नाल उथलयो ने
वारस शाह ना रब्ब बखील[2] होवे चारे राह नसीब दे मलयो ने

शब्दार्थ
  1. रास्ता
  2. ईष्र्यालु