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259 / हीर / वारिस शाह

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धुरों हुंदड़े कावसां[1] वैर आये बुरियां चुगलियां अते बखीलियां ओए
मैंनूं तर्स आया वेख जुहद[2] एहदा गलां मिठियां बहुत रसीलियां ओए
पानी दुध विचों कढ लैन चातर जदों छिल के पांवदे तीलियां ओए
गुरु आखया मुंदरां झब ल्यायो छड दयो गलां अठखीलियां ओए
नहीं डरन हुन मरन थीं भैर आशक जिन्हां सूलियां सिरां ते झीलियां ओए
वारस शाह फिर नाथ ने हुकम कीता कढ अखियां नीलियां पीलियां ओए

शब्दार्थ
  1. द्वेष, ईष्र्या
  2. तपस्या