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25 / हीर / वारिस शाह

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केहा भेड़ मचाया ई कचया वे मत्था डाहया ई सौंकनां वांग केहा
जाह सजरा कम्म गवा नाहीं हो जासीया जोबन फेर बेहा
रांझे खा गुस्सा सिर धौल मारी केही चबड़ी उस नूं जिवें लेहा
रांझा हो गुस्से उठ रवां[1] होया भाबी रख ओह तां नांह रेहा
हत्थ पकड़ के जुतियां मार बुकल रांझा हो टुरया वारस शाह जेहा

शब्दार्थ
  1. चल पड़ा