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81 / हीर / वारिस शाह

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हीर चाए भता खंड खीर मखन मिएं रांझे दे पास लै जांवदी ए
तेरे वासते जूह मैं भाल थकी रो रो अपना हाल सुनांवदी ए
कैदों ढूंढ़दा खोज नूं फिरे भौंदा वास चूरी दी बेलयों आंवदी ए
वारस शाह मियां वेखो रंग लंगी एह शैतान दी कलहि जगांवदी ए

शब्दार्थ
<references/>