गृह
बेतरतीब
ध्यानसूची
सेटिंग्स
लॉग इन करें
कविता कोश के बारे में
अस्वीकरण
Changes
मत ठहरो / श्रीकृष्ण सरल
10 bytes added
,
03:47, 12 अगस्त 2011
जो कुछ करना है, उठो! करो! जुट जाओ!
जीवन का कोई क्षण, मत व्यर्थ गँवाओ
कर लिया काम, भज लिया राम, यह सच
हैं
अवसर खोकर तो सदा हाथ मलना है
मत ठहरो, तुमको चलना ही चलना है।
</poem>
डा० जगदीश व्योम
929
edits