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"चन्दनमन / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’" के अवतरणों में अंतर

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डॉ अर्पिता अग्रवाल के अनुसार रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु के हाइकु मानवीय और प्राकृतिक प्रेम के उच्छल प्रयास हैं. खिलखिलाए  
 
डॉ अर्पिता अग्रवाल के अनुसार रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु के हाइकु मानवीय और प्राकृतिक प्रेम के उच्छल प्रयास हैं. खिलखिलाए  
 
पहाड़ी नदी जैसी  
 
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तुतली बोली  
 
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आरती में किसी ने  
 
आरती में किसी ने  
मिसरी घोली--(पृष्ठ-77)
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मिसरी घोली .(पृष्ठ-77)
सचमुच कानों में चाँदी की घण्टियों की मधुर ध्वनि गूँज उठती है । हिमांशु जी के हाइकुओं में प्रकृति के नाना रूपों के मनोहर चित्रों के  साथ मानवीय संवेदनाओं की निश्छल , पावन अनुगूँज भी है :
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‘बीते बरसों/
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अभी तक मन में
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खिली सरसों’--(पृष्ठ-81)
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‘दर्द था मेरा
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मिले शब्द तुम्हारे
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गीत बने थे’-(पृष्ठ-83)
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20:31, 16 अप्रैल 2012 का अवतरण

चन्दनमन
Chandanvan.jpg
रचनाकार सम्पादन- भावना कुँअर और रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
प्रकाशक अयन प्रकाशन, 1/20 महरौली , ,नई दिल्ली–110030
वर्ष 2011
भाषा हिन्दी
विषय हाइकु कविताएँ
विधा हाइकु
पृष्ठ 120
ISBN 978-81-7408-462-0
विविध मूल्य(सजिल्द) :160
इस पन्ने पर दी गई रचनाओं को विश्व भर के स्वयंसेवी योगदानकर्ताओं ने भिन्न-भिन्न स्रोतों का प्रयोग कर कविता कोश में संकलित किया है। ऊपर दी गई प्रकाशक संबंधी जानकारी छपी हुई पुस्तक खरीदने हेतु आपकी सहायता के लिये दी गई है।

डॉ अर्पिता अग्रवाल के अनुसार रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु के हाइकु मानवीय और प्राकृतिक प्रेम के उच्छल प्रयास हैं. खिलखिलाए पहाड़ी नदी जैसी मेरी मुनिया’‘-(पृष्ठ-77) तुतली बोली आरती में किसी ने मिसरी घोली .(पृष्ठ-77)