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मन्तरिया मामा / अमरेन्द्र
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04:51, 14 मई 2016
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अगड़म
.
-
बगड़म मामा दू
दिन भर मारै मन्तर-छू
मन्तर में छोहारा छै
दिन में सूझै तारा छै ।
</poem>
Rahul Shivay
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