भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
"प्रतिध्वनि / महमूद दरवेश" के अवतरणों में अंतर
Kavita Kosh से
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार= महमूद दरवेश |अनुवादक=अनिल जनविजय...' के साथ नया पृष्ठ बनाया) |
अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) |
||
पंक्ति 3: | पंक्ति 3: | ||
|रचनाकार= महमूद दरवेश | |रचनाकार= महमूद दरवेश | ||
|अनुवादक=अनिल जनविजय | |अनुवादक=अनिल जनविजय | ||
− | |संग्रह= | + | |संग्रह= |
}} | }} | ||
{{KKCatKavita}} | {{KKCatKavita}} |
22:39, 13 जून 2018 के समय का अवतरण
जैतून की छाया में
गूँज रहा है जीवन
और मैं
लटका हूँ अलाव के ऊपर
ज़ंजीरों में जकड़ा हुआ
जल्लाद
खिलखिला रहे हैं
हँस रहे हैं वहशी हँसी
अपने लम्बे टेढ़े नाख़ूनों से
छील रहे हैं मेरा हृदय
और मैं
बेतहाशा चीख़ रहा हूँ
घोषणा कर रहा हूँ जीवन की —
कि अभी जीवित हूँ मैं
ऐ आसमान !
इन हिंसक तख़्तों पर
प्रहार कर तू
बुझा दे यह जालिम आग
अपनी पवित्र बौछार से
बदल दे इसे धुएँ में
अदृश्य कर दे इसे
और तब
तब मैं इस धरती का बेटा
उतरूँगा इस सलीब से
और लौटूँगा अपनी मातृभूमि पर
चलता हुआ नंगे पैर
अँग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल जनविजय