Changes

मंगलाचरण / मैथिलीशरण गुप्त

14 bytes added, 03:09, 28 अक्टूबर 2009
|संग्रह=द्वापर / मैथिलीशरण गुप्त
}}
{{KKCatKavita}}
धनुर्बाण वा वेणु लो श्याम रूप के संग,<br>
मुझ पर चढ़ने से रहा राम ! दूसरा रंग।<br><br>
मेरा रंक शरीर हरे !<br>
कैसे तुष्ट करेगी तुझको,<br>
नहीं राधिका बुधा हरे !<br>
पर कुछ भी हो, नहीं कहेगी <br>
तेरी मुग्धा मुधा हरे !<br>
Delete, KKSahayogi, Mover, Protect, Reupload, Uploader
19,333
edits