Neeraj Daiya (चर्चा | योगदान) ('<poem>घर सूं गळी गळी सूं गांव गांव सूं ठाह नीं कठै-कठै भ...' के साथ नया पन्ना बनाया) |
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गळी सूं गांव | गळी सूं गांव |
18:28, 16 अक्टूबर 2013 के समय का अवतरण
घर सूं गळी
गळी सूं गांव
गांव सूं ठाह नीं कठै-कठै
भंवै भाई
सिंझ्या
उण सूं पैली पूगै
गांव रा ओळमा
समूळो घर
ऊभो दीखै भाई साथै
भाई रै कूड़ माथै
न्हाखै धूड़
ओळमा बूरता!
म्हैं हांसी ही गळी में
फगत एक दिन
बांदर-बांदरी रो
खेल देखतां
जा पछै
बंद है
म्हारै घर री
बाखळ रो बारणो
अणमणा है
घर रा सगळा
उण दिन रै पछै!