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<poem>
वे बारिश में धूप की तरह आती हैं–
थोड़े समय के लिए और अचानक
हाथ के बुने स्वेटर, इंद्रधनुष, तिल के लड्डू
और सधोर की साड़ी लेकर
वे आती हैं झूला झुलाने
पहली मितली की ख़बर पाकर
और गर्भ सहलाकर
लेती हैं अन्तरिम रपट
गृहचक्र, बिस्तर और खुदरा उदासियों की।
झाड़ती हैं जाले, संभालती हैं बक्से
मेहनत से सुलझाती हैं भीतर तक उलझे बाल
कर देती हैं चोटी-पाटी
और डाँटती भी जाती हैं कि री पगली तू
किस धुन में रहती है
कि बालों की गाँठें भी तुझसे
ठीक से निकलती नहीं।
बालों के बहाने वे बारिश में धूप गाँठें सुलझाती हैं जीवन की तरह आती हैं–<br>थोड़े समय के लिए और अचानक<br>हाथ के बुने स्वेटरकरती हैं परिहास, इंद्रधनुष, तिल के लड्डू<br>सुनाती हैं किस्से और सधोर की साड़ी लेकर<br>फिर हँसती-हँसाती वे आती हैं झूला झुलाने<br>दबी-सधी आवाज़ में बताती जाती हैं– पहली मितली की ख़बर पाकर<br>चटनी-अचार-मूंगबड़ियाँ और बेस्वाद संबंध चटपटा बनाने के गुप्त मसाले और गर्भ सहलाकर<br>नुस्खे– लेती हैं अन्तरिम रपट<br>सारी उन तकलीफ़ों के जिन पर गृहचक्र, बिस्तर और खुदरा उदासियों की।<br><br>ध्यान भी नहीं जाता औरों का।
झाड़ती हैं जाले, संभालती आँखों के नीचे धीरे-धीरे जिसके पसर जाते हैं बक्से<br>साये मेहनत और गर्भ से सुलझाती रिसते हैं भीतर तक उलझे बाल<br>महीनों चुपचाप– कर देती हैं चोटीख़ून के आँसू-पाटी<br>से और डाँटती भी जाती हैं कि री पगली तू<br>चालीस के आसपास के अकेलेपन के उन किस धुन काले-कत्थई चकत्तों का मौसियों के वैद्यक में रहती है<br>कि बालों की गाँठें भी तुझसे<br>एक ही इलाज है– ठीक से निकलती नहीं।<br><br>हँसी और कालीपूजा और पूरे मोहल्ले की अम्मागिरी।
बालों के बहाने<br>वे गाँठें सुलझाती हैं जीवन की<br>करती हैं परिहास, सुनाती हैं किस्से<br>और फिर हँसती-हँसाती<br>दबी-सधी आवाज़ में बताती जाती हैं–<br>चटनी-अचार-मूंगबड़ियाँ और बेस्वाद संबंध<br>चटपटा बनाने के गुप्त मसाले और नुस्खे–<br>सारी उन तकलीफ़ों के जिन पर<br>ध्यान भी नहीं जाता औरों का।<br><br> आँखों के नीचे धीरे-धीरे<br>जिसके पसर जाते हैं साये<br>और गर्भ से रिसते हैं महीनों चुपचाप–<br>ख़ून के आँसू-से<br>चालीस के आसपास के अकेलेपन के उन<br>काले-कत्थई चकत्तों का<br>मौसियों के वैद्यक में<br>एक ही इलाज है–<br>हँसी और कालीपूजा<br> और पूरे मोहल्ले की अम्मागिरी।<br><br> बीसवीं शती की कूड़ागाड़ी<br>लेती गई खेत से कोड़कर अपने<br>जीवन की कुछ ज़रूरी चीजें–<br>जैसे मौसीपन, बुआपन, चाचीपंथी,<br> अम्मागिरी मग्न सारे भुवन की। <br><br/poem>