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रोटी का सवाल / अशोक चक्रधर

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कितनी रोटी<br>गाँव में अकाल था,<br>बुरा हाल था।<br>एक बुढ़ऊ ने <br>समय बिताने को,<br>यों ही पूछा <br>मन बहलाने को-<br>ख़ाली पेट पर<br>कितनी रोटी खा सकते हो <br>गंगानाथ ?<br><br>
गंगानाथ बोला-<br>सात !<br><br>
बुढ़ऊ बोला-<br>ग़लत ! <br>बिलकुल ग़लत कहा,<br>पहली रोटी <br>खाने के बाद <br>पेट ख़ाली कहाँ रहा।<br>गंगानाथ, <br>यही तो मलाल है,<br>इस समय तो <br>सिर्फ़ एक रोटी का सवाल है।<br>