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सभी को पी लूँ , | सभी को पी लूँ , | ||
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सभी क्षण जी लूँ | सभी क्षण जी लूँ | ||
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किन्तु विधि के उन निषेधों, | किन्तु विधि के उन निषेधों, | ||
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उन विरोधों को कहूँ क्या- | उन विरोधों को कहूँ क्या- | ||
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जो विवश करते : | जो विवश करते : | ||
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19:50, 1 नवम्बर 2009 के समय का अवतरण
प्यास तो ऐसी लगी थी-
क्या समन्दर,क्या सितारे
सभी को पी लूँ ,
कामना ऐसी जगी थी-
क्या हमारे, क्या तुम्हारे,
सभी क्षण जी लूँ
किन्तु विधि के उन निषेधों,
उन विरोधों को कहूँ क्या-
जो विवश करते :
प्रीति जो मन में रंगी थी-
तोड़ डालूँ बिन-विचारे,
होंठ को सी लूँ ।