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"गळगचिया (8) / कन्हैया लाल सेठिया" के अवतरणों में अंतर

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दूबड़ी कयो - गाय, चर तो भलांई, पण चींथ मती
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गाय बोली, कांईं करूं? रामजी म्हारी भूख नै पांगळी को बणाई नीं!
 
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15:32, 4 मार्च 2017 के समय का अवतरण

दूबड़ी कयो - गाय, चर तो भलांई, पण चींथ मती

गाय बोली, कांईं करूं? रामजी म्हारी भूख नै पांगळी को बणाई नीं!