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तरेसठ / प्रमोद कुमार शर्मा

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सूतो है सबद
गैरी नींद मांय
जोवतो हुसी कोई सुपनो
म्हैं क्यूं दखल देवूं
आपै ई जागसी
मेघवाळ मुकनो!
(कथाकार भाई रामेश्वर गोदारा रै किरदार 'मुकनै मेघवाळ' नैं समरपित)