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वर पायहुँ भोलानाथ गौरा / अंगिका लोकगीत

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

वर पायहुँ भोलानाथ गौरा बड़ी करम की आगरी

बड़ी करम की आगरी हो बड़ी करम की आगरी
वर पायहुँ भोलानाथ गौरा बड़ी करम की आगरी

कौन तिथि को लगन पड़े हो
कौन तिथि को लगन न हो

कौन तिथि विवाह गौरा बड़ी करम की आगरी
वर पायहुँ भोलानाथ गौरा बड़ी करम की आगरी

एकादसी को लगन पड़े हो
एकादसी को लगन न हो
चतुर्दसी विवाह गौरा बड़ी करम की आगरी
वर पायहुँ भोलानाथ गौरा बड़ी करम की आगरी

तब शिवजी विवाह को चललें
तब शिवजी विवाह विवाह न हो

भूत प्रेत बारात गौरा बड़ी करम की आगरी
वर पायहुँ भोलानाथ गौरा बड़ी करम की आगरी

तब मैना परछन को चललैं
तब मैना परछन न हो
नाग दियो फुफकार गौरा बड़ी करम की आगरी
वर पायहुँ भोलानाथ गौरा बड़ी करम की आगरी

तब शिवजी मंडप को चललें
तब शिवजी मंडप न हो
सखी सब मंगल गाय गौरा बड़ी करम की आगरी
वर पायहुँ भोलानाथ गौरा बड़ी करम की आगरी

तब शिवजी कोहबर को चललें
तब शिवजी कोहबर न हो
मगही पान लगाय गौरा बड़ी करम की आगरी
वर पायहुँ भोलानाथ गौरा बड़ी करम की आगरी

वर पायहुँ भोलानाथ गौरा बड़ी करम की आगरी