Last modified on 11 मई 2010, at 01:35

बीनती हूँ / क्रांति

अनिल जनविजय (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 01:35, 11 मई 2010 का अवतरण (नया पृष्ठ: {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=क्रांति |संग्रह= }} {{KKCatKavita}} <poem> बीनती हूँ गेहूँ, बीन…)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

बीनती हूँ गेहूँ,
बीनती हूँ चावल,
धनिया, जीरा,
मूंग, मसूर, अरहर_

पर असल में
बीनती हूँ केवल कँकर।

कहने को
अनाज बदला होता है
मेरी थाली मे हर दोपहर।