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पिट्ठा / पतझड़ / श्रीउमेश

दादी के अँचरा पकड़ी पिन्टूँ कोहराम मचैलेॅ छै।
पिट्ठ लेॅ झौहर करलेॅ छै; सब केॅ नाच नचैलेॅ छै॥
दादीं चाव्रोॅ के चिकसा में, सकरकंद गुड़ियाबै छै।
चिकना भू जी, पीसी केॅ, गूड़ोॅ में खूब मिलाबै छै॥
गोल-गोल पिट्ठा तैयार करलकै दादीं छांकी केॅ।
पिन्टू खैलकोॅ ऊ पिट्ठा सौंसे ऐंगना में नांची केॅ॥
रोपतोॅ पिन्टू एक गाछ, पिट्ठा के अपना ऐंगनों में।
गाछी पर वेंचढ़ी-चढ़ी केॅ रोजे खैतोॅ सपनामें॥