बीड़ी / सुदामा प्रसाद 'प्रेमी'

जुगराज रयां तुम मेरी बीड़्यूं
तुमना सैरो रात कटैनी
एक का बाद हैकी फूकी
अपणा मन का भाव जगैनी।

दुःख मा मिन तुमपर अपणो
भारि भरोसो सी-धारी
जगै-जगै की तुमको ही मिन
अपणो दिल भी कटम्वारी।
फुकदा-फुकदा तुम तैं मेरी
खबड़ी लोळी खूब पटैनी
पर रात खुन पर भी मेरी
आंखी तींदि-की-तींदी रैनी।

बूणि-बूणि की जाळ कथा ही
अपणा मन तैं रौं मी ाूणू
अरे, न कैको कोई होन्दो
फिर कैका पे्रम कु रै तू रूणू।

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