{{KKCatKavita}}
<poem>
अगर तुम रखते हो एक फर्न फ़र्न का एक पौधा
एक पत्थर के नीचे
अगले ही दिन वो हो जाएगा
लगभग गायब ग़ायब
जैसे पत्थर
उसे लील गया हो ।
अगर तुम दबाए रखते हो
किसी माशूक माशूक़ का नाम, बिन बोले
ज़ुबान के नीचे, बहोत देर तक
तो बन जाता खून ख़ून ये
वो हवा से खींच ली गई सांससाँस
पोशीदा है
तुम्हारे लफ्ज़ों लफ़्ज़ों के नीचे।नीचे ।
कोई कहा देख पाता है
उस खुराक़ ख़ुराक़ को जो तुम्हें ज़िंदा ज़िन्दा रखती है ।
1998