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जीवनवृक्ष / राधावल्लभ त्रिपाठी
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14:10, 17 मई 2009
झर जाएँ सारे के सारे सूखे पत्ते एक साथ
मैंरह
मैं रह
लूंगा अकेला ही मसान में शंकर की तरह ठूँठ की तरह
नंगा सूखी टहनियों के साथ भस्म कर दिए गए मनोरथों के साथ
अनिल जनविजय
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