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अदृश्य / पद्मजा बाजपेयी

कौनहो? अदृश्य, मेरी कल्पना को चूमते हो?
और मेरी भावना को, अमिय बनकर सिचतें हो,
कौन हो तुम कौन हो?
लालिमा हो, पुष्य हो, गीत हो या चाँदनी हो,
अवनि हो, अंबर हो, शिखर हो या रत्नेश हो,
कौन हो तुम कौन हो?
दृष्टि हो, शक्ति हो, आवाज हो या मौन हो,
अश्रु हो, आनंद हो, कर्म हो, संग्राम हो,
कौन हो तुम कौन हो?
सत्य हो, विश्वास हो, ब्रह्म हो या प्राण हो,
व्याप्त हो सर्वत्र ही, अव्यक्त, केवल नाम हो।
नाम हो तुम नाम हो।