Last modified on 30 मार्च 2021, at 23:58

अभिसिंचित करता पानी / कविता भट्ट

जीवन की आशाएँ सर्वदा
अभिसिंचित करता पानी।
तृप्त-मन अभिलाषाएँ सदा
यों परिपूरित करता पानी।
न बहाओ मुझे तुम पानी सा,
यह अनुसूचित करता पानी।
मोल समझ तब ही है आता
जब आशा पर फिरता पानी।

( विश्व जल दिवस ,22 मार्च, 2021)