अल्पमतक बहुमतक / चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’

अल्पमतक बहुमतक सोहारी
बेलि रहल छथि सत्ताधारी,
नऽव नोथारी, भरि भरि थारी
पाबथि राजनीति व्यापारी।

हाकिमकेँ बङला चौचारी,
मङनी जीप अनेर सवारी,
किन्तु कर्मचारीक लचारी
जनता गाबओ बैसि नचारी।

आबि विदेशी दै’ अछि हुलकी,
पाटी सब भय गेल’ छि मुलकी,
अमरीकी गहुमक खा फुलकी
जनता चलय चालि पुनि दुलकी
ई किसान अलबौकक टाड़ी,
पंपिङ सेटक करथि पुछारी।

रंग-विरंगक एमेले अछि,
गाम गाममे हूलेले अछि,
पगहा-पड़रू सहित पानिमे
ई महींस निश्चय गेले अछि,
दल-बदलू सब सोचि रहल छथि
अदलि-बदलि दल हाथ सुतारी।

पाँच सात दल जँ मिलि गेला,
भेल गुरू सब, रहल न चेला,
लागल अछि अफसर केर मेला,
गुड़कय नहि सरकारी ठेला
केन्द्रेमे बैसल छनि नारी
की कय सकता अटलबिहारी।

रचना काल 1967

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