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कीमिया / विमलेश शर्मा

उँगली पर भाप लगी
आह कहीं दूर सुनाई दी
और आँसू उन आँखों से बह निकले
यकायक
देवत्व को साक्षात् देख
एक भूमि नम हुई
समन्दर कुछ और खारा
और धूप बनी शफ्फाक चाँदनी
एक साधक था
दूसरा भी तथागत
दोनों अन्वेषी
मौन के अधिकारी
कहते हैं जिसने भी उन्हें देखा
मोक्ष को प्राप्त हुआ
और भूमि जहाँ अश्रु छलके थे
कालान्तर में वहाँ कल्प वृक्ष उग आए थे !