Last modified on 27 फ़रवरी 2018, at 22:05

कैटवॉक / प्रज्ञा रावत

ऐसे समय में जब
कैटवॉक कर रहे हों
कवि

और रैम्प पर
इठला रही हों कविताएँ

तो कौन सुने आत्मा का गीत।
</poem