कोशी / चन्द्रप्रकाश जगप्रिय

हिम-आलय सें गोड़ बढ़ावै
अंग महाजनपद में आवै
कत्तेॅ-कत्तेॅ कथा सुनावै
कोशी माय सबके दुलरावै।

जखनी खौलै कोशी माय
हित-अनहित नै जरो बुझाय
जे भी मिलै दहैलेॅ जाय
जों गोस्सावै कोशी माय।

औंटल पौंटल सबकेॅ गेल
पानी पर तिनसुकिया रेल
गोड़ लगै छी कोशी माय
बाघिन बदला रहियोॅ गाय।

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