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चक्रव्यूह / नवीन निकुंज

कत्तेॅ-कत्तेॅ मोड़ आवै छै
एकपैरिया रास्ता मेॅ
तोरा तांय आवै मेॅ
आँखोॅ के नगीच छोॅ
मजकि दिखाय नै पड़ै छोॅ
चललोॅ तेॅ छेलां
शशिरे संग
मजकि गुजरी गेलै
वसन्तो
बिना एक्को पल रुकलेॅ ।
कहाँ आवी केॅ फँसी गेलां
समय तेॅ जेना चक्रव्यूह रहेॅ
विश्वास जेना प्रपंच
अर्थ जेना अनर्थ
तहियो अगोरी केॅ
चललोॅ जाय रहलोॅ छी
अखम्मर आशा
आशा जे बन्द छै
कोय अन्हरिया गुफा मेॅ
कहिया ऐतै उ$
राजकुमार के भेषोॅ मेॅ
गुफा के चट्टान टुटतै
आरो इंजोर फूटी पड़तै वहाँ
सुग्गा-आशा रोॅ
रापंख खोली उड़ी पड़तै
वहेॅ राजकुमारोॅ के संग-संग ।