नयन हँसे
थे बीतराग कल
यों बँधे आलिंगन,
पिय नैनों ने
दिया जीवन -दान
करूँ अमृतपान।
2
अहो! कर्त्तव्य !
विराग में खड़ा है-
मूक ,जड़,बधिर,
मद में चूर
अधिकार- मुस्काए
सिंहासन विराजे।
नयन हँसे
थे बीतराग कल
यों बँधे आलिंगन,
पिय नैनों ने
दिया जीवन -दान
करूँ अमृतपान।
2
अहो! कर्त्तव्य !
विराग में खड़ा है-
मूक ,जड़,बधिर,
मद में चूर
अधिकार- मुस्काए
सिंहासन विराजे।